Durga Puja Ka Pehla Din – Shelpurti Mata ka Mehatva – Shelputri Durga Roop kyu vyakhyat Hua

आप माँ दुर्गा के नव रात्रि के दिनों को तो मानते ही होंगे पर क्या आपको पता है कि नव रात्रि का पहला दिन क्यों मनाया जाता है तो आइये जानते हैं – Durga Puja Ka Pehla Din – Shelpurti Mata ka Mehatva – Shelputri Durga Roop kyu vyakhyat Hua

 

Durga Puja Ka Pehla Din Kon Si Mata Ka Hota Hai ?

दुर्गा पूजा चैत्र की परमा से स्थापित होती है और यह नो दिनों के लिये विराजमान होती है तथा इनके बैठने से ही मंदिरों में एक भव्य रोनक आ जाती है और सभी जगह पंडाल सज जाते है और जगह जगह भजन कीर्तन की आवाज गूंजने लगती है और इस तरह बहुत आकर्षित माहोल बन जाता है इस तरह नो ही दिन भक्तो की कतार माँ के दरवार में लगी रहती है.

 

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पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है. माँ शैलपुत्री भक्तो के सभी रोगों को दूर करती है दुर्गा पूजा को नो देवी भी कहते है इस समय बहुत ही सुंदर माहोल बन जाता है पहले दिन से ही भक्त माँ के अरधाना में लीं हो जाते है.

 

Durga Puja Ke Pehle Din Me Shelpurti Mata Ka Mehatva Kya Hai ?

माँ शैलपुत्री को सफ़ेद पकवानों का भोग लगाया जाता है और गाय के घी में बनी हो तो बहुत ज्यादा पसंद है और माँ शैलपुत्री की आराधना करने से  सभी तरह की बीमारी दूर हो जाती है और इस तरह हम उनकी सेवा करके माँ शैलपुत्री का आशीर्बाद भी मिल जाता है

माता शैलपुत्री को नो देवियों में सबसे पहले पूजा जाता है इस तरह देश के विभिन्न राज्यों में दुर्गा पूजा को अलग अलग तरीके से मनाया जाता है यह भारत के गुजरात और मुंबई में सबसे जायदा मनाया जाता है नवदुर्गाओं में पहले दिन माँ दुर्गा के रूप में शैलपुत्री की पूजा की जाती है इनकी पूजा करने से योगी के योग साधना पुरी होती है.

और साथ ही माँ शैलपुत्री को पार्वती और हेमलता के नाम से भी जाना जाता है नवरात्रि में कलश की स्थापना करनी चाहिए पहले दिन ही होती है नो देवी के आने पर हम उस जगह को साफ करते है तथा हम उस कलश को रख देगे.

 

Shelputri Durga Roop Ki Pujan Vidhi Kya Hai ?

माँ की पूजा विधी बहुत ही आसान है सबसे पहले जिस भी स्थान पर माँ की पूजा करनी है उस जगह को अच्छी तरह साफ करलें और लकड़ी के पटे को रखे और उस पर माता की मूर्ती रखे और अपनी मनोकामना भी रखे और अपने हाथ में लाल रंग का फूल ले और इनका ध्यान करे और अपनी मनोकामना के साथ फूल माँ के कमल चरणों में अर्पण कर दे और प्रसाद चडाये और उनका मन्त्र का जप करे कलश के रखने से सारे देवताओ का आवगमन हो जाता है माँ को पहले दिन कमल का फुल चाड़ना चाहिए माँ को ममता का स्वरुप माना जाता है इसके बाद माँ का ध्यान करे और फिर माँ के आरती करें.

 

Shelputri Durga Roop Kyu Vyakhyat Hua ?

माँ शैलपुत्री का जन्म पहाड़ो वाली जगह होने के कारण नाम शैलपुत्री पड़ा और इन का वाहन सफ़ेद वेल है बेल इनका वाहन इसलिये है क्योकि यह संयम और सादगी का प्रतीक है और भगवां शिव का वाहन भी नंदी है पूर्व जन्म में माँ, राजा दक्ष की पुत्री थी और उनका नाम सती था और उनका विवाह शिवजी के साथ हुआ था सती जी ने यज्ञ में अपने प्राणों की आहूती दे दी थी.

और इसमें रजा ने सबको बुलाया लेकिन शिवजी को नही बुलाया पर माता सती अपनी माँ और बहन से मिलने बिना बुलाये ही गयी तो उन्होंने वहा पर देखा की कोई भी उनसे सम्मान से बात नही कर रहा है और शिव जी के लिये भी बहुत कटु वचन कहने लगे तो उसी समय माँ सती ने हवन में अपने प्राणों की आहुती दे दी और अगले जन्म में उनका जन्म राजा हिमाचल के यहां हुआ और उन्हें यहाँ शैलपुत्री के नाम से जाना जाने लगा, पार्वती और हेमलता भी इनका ही नाम है जब इस बात का पता भोले जी को लगा तो उन्होंने पुरे यज्ञ को ही नस्ट कर दिया

 

Durga Puja Me Pehle Din Vrat Rakhne Se kya Phal Milta hai ?

माँ शैलपुत्री का व्रत करने से सभी रोगो से मुक्ती मिल जाती है.

भय का भी अंत हो जाता है.

बुधि ठीक हो जाती है माँ आशिर्वाद से जीवन सखुमय हो जाता है.

सभी मनोकामनाऐ भी पुरी हो जाती है.

माँ शैलपुत्री के व्रत करने से योग साधना जाग्रत हो जाती है.

कलश के नीचे 7 तरह के अनाज बोये जाते है जिन्हें दशमी के दिन इन्हें काटा जाता है माँ को देशी घी अर्पण करना चाहिए माँ का रूप चन्द्रमा के सामान है

 

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